संसार की अरबों की संपत्ति भी महाव्रत के आगे तिनके जैसी है–आचार्यश्री महाश्रमण

लाडनूं, 15 जून, 2026
जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने जैन विश्व भारती के सुधर्मा सभा परिसर में चतुर्विध धर्मसंघ को 'हित और सत्य बोलो' विषय पर पावन आगम पाथेय प्रदान किया। आचार्यश्री ने सत्य महाव्रत की सूक्ष्म व्याख्या करते हुए प्राणों की बाजी लगाकर भी झूठ का सर्वथा त्याग करने का संदेश दिया।
सत्य की कठिन साधना : गला कट जाए पर झूठ मंजूर नहीं : आचार्य प्रवर ने दूसरे महाव्रत 'सर्व मृषावाद विरमण' की महत्ता को अद्भुत और कड़े शब्दों में रेखांकित किया।
१. करोड़ों की संपत्ति भी तुच्छ: दीक्षा के समय साधु तीन करण और तीन योग से झूठ का सर्वथा त्याग करता है। इस महाव्रत के सामने संसार की करोड़ों-अरबों की संपत्ति भी बेहद तुच्छ और नाकुछ सी है।
२. अखंड अप्रमत्तता की कसौटी: साधु जीवन में चाहे कितनी ही विकट परिस्थितियां या प्रलोभन आ जाएं, कभी भी झूठी बात न तो मुंह से बोलनी चाहिए और न ही कहीं लिखनी चाहिए। आदर्श स्थिति यही है कि साधक को 'गला कटवाना मंजूर हो, पर झूठ बोलना कभी मंजूर न हो।'
३. होठों के दरवाजे रखें बंद : सच्चाई की दृढ़ता के लिए आत्मा में सरलता, निर्लोभता, अभय और गंभीरता का होना अनिवार्य है। इंसान को अल्पभाषी होना चाहिए। हंसी-मजाक में अत्यधिक बहकने, क्रोध या लोभ के वशीभूत होने से सत्य खंडित होता है; अतः इन होठ रूपी दरवाजों को हमेशा संयम से बंद रखना चाहिए।
केश लुंचन के बदले चतुर्विध संघ को बख्शीस : आज सुधर्मा सभा में आचार्यश्री के मुखारविंद के लुंचन (केश लोचन) के पावन प्रसंग पर चतुर्विध संघ ने लुंचन की इस कठिन निर्जरा में सहभागी बनने की सविधि प्रार्थना की, जिस पर आचार्यप्रवर ने पूरे संघ को आध्यात्मिक प्रेरणा दी:
१. साधु-साध्वी व समणी वर्ग : एक सप्ताह तक प्रतिदिन आधा-आधा घंटे का विशेष आगम स्वाध्याय करेंगे।
२. मुमुक्षु वर्ग : प्रतिदिन आधा घंटे का कोई भी धार्मिक-साहित्यिक स्वाध्याय संपन्न करेंगे।
३. श्रावक-श्राविका वर्ग : गृहस्थ समाज के सभी लोग इस एक सप्ताह के भीतर अनिवार्य रूप से ३ अतिरिक्त सामायिक पूर्ण करके इस महान निर्जरा के साक्षी बनेंगे।
पूज्या साध्वी आशावती जी की स्मृति में चतुर्विध संघ ने किया ध्यान
मंगल देशना के दौरान पूज्य प्रवर आचार्यश्री की पावन सन्निधि में वैराग्यधनी साध्वी आशावती जी की स्मृति सभा का भावपूर्ण आयोजन हुआ।
पूज्य प्रवर की श्रद्धांजलि: आचार्यश्री ने साध्वी जी का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी आत्मा के प्रति मध्यस्थ भाव रखने की प्रेरणा दी। तदुपरान्त पूरे चतुर्विध धर्मसंघ के साथ मिलकर दिवंगत आत्मा के कल्याण हेतु 'चार लोगस्स' का सामूहिक कायोत्सर्ग ध्यान किया।
भावनाओं की अभिव्यक्ति : साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुत विभा जी, मुख्य मुनि श्री महावीर कुमार जी सहित अनेक साधु-साध्वियों ने दिवंगत साध्वी जी के प्रति अपनी मध्यस्थ भावनाएं रखीं। संसार पक्षीय परिवार की ओर से हर्षा मरोठी, निर्मल भूरा, ईशा बैद, हंसराज भूरा तथा तेरापंथी सभा गंगाशहर की ओर से नवरतन मल बोथरा ने कृतज्ञता व्यक्त की।