उत्तरज्झयणाणि आगम के माध्यम से पूज्यप्रवर ने दिया स्वाद का त्याग करने और सहज जीवन जीने का संदेश

लाडनूं। 13 जुलाई, 2026
तेरापंथ धर्म संघ के ग्यारहवें अधिशास्ता, अहिंसा यात्रा प्रणेता महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमण जी ने 'उत्तरज्झयणाणि' आगम के माध्यम से 'एषण समिति: स्वरूप और विधि' विषय पर गंभीर विवेचन किया। आचार्यश्री ने फरमाया कि साधु जीवन में पांच महाव्रत, पांच समितियां और तीन गुप्तियां होती हैं। इनमें तीसरी 'एषणा समिति' सीधे भोजन, पानी और वस्त्र की शुद्धता से जुड़ी है। 
लाइफ की ३ फर्स्ट-क्लास जरूरतें : आचार्यश्री ने समझाया हवा-पानी का असली गणित
पूज्यप्रवर ने आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंसानी शरीर की प्राथमिकताओं को बहुत ही सरल क्रम में समझाया:
१. हवा (ऑक्सीजन): यह जीवन की सबसे पहली और अनिवार्य जरूरत है। इसके बिना कुछ दिन तो क्या,
कुछ घड़ी (मिनट) भी निकालना नामुमकिन है।
२. जल (पानी) : जीवन का दूसरा सबसे बड़ा आधार। भोजन के बिना इंसान कई दिन गुजार सकता है, 
लेकिन पानी के बिना लंबा वक्त निकालना बेहद कठिन है।
३. भोजन (फूड): यह तीसरे स्थान पर आता है। सिर्फ पानी पीकर भी इंसान कई दिनों तक जीवित रह सकता है।
नो-सिग्नल नो-टेस्ट : गोचरी के कड़े नियम और अनासक्ति का सिद्धांत : आचार्यश्री ने साधु जीवन की गोचरी  की शुचिता के लिए 'कंट्रोल' का महत्व बताते हुए फरमाया।
१. १६ उद्गम दोषों से बचाव : साधु को गोचरी में पूरी गवेषणा (जांच-पड़ताल) करनी चाहिए, ताकि आधाकर्मी जैसे दोषों से बचा जा सके। कोई भी चीज लेने से पहले अच्छी तरह पूछताछ जरूरी है।
२. स्वाद के लिए कोई इशारा नहीं : चारित्रात्माओं को स्वाद वृत्ति के वशीभूत होकर गृहस्थ के घर में किसी भी तरह का इशारा या संकेत करने से पूरी तरह बचना चाहिए।
३.संग्रह का त्याग (मिनिमलिज्म): घरों में जो सहज रूप से और जितना मिले, उसे ही समता भाव से ग्रहण करें। 
लेख पत्र का सामूहिक उच्चारण और कल्याणक बख्शीश : प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने चतुर्दशी के संबंध में विशेष हाजरी का वाचन किया। 
१. कल्याणक बख्शीश:उत्कृष्ट संयम और आराधना के लिए आचार्यश्री ने साध्वी चन्दनप्रभा जी को २१ कल्याणक और साध्वी पद्म प्रभा जी को ५ कल्याणक बख्शीश किए।
२.ज्ञान की परीक्षा : इसके बाद आचार्यश्री ने साध्वी पद्मप्रभा जी से दसवें आलियं के पांचवे अध्ययन के श्लोक सुनाने को कहा। श्लोकों का बिल्कुल सटीक उच्चारण करने पर प्रसन्न होकर पूज्यप्रवर ने उन्हें ५ और कल्याणक प्रदान किए।