'पावस प्रवास' का हुआ लोकार्पण, उपासक श्रेणी को दिया १,००० सदस्यों का लक्ष्य

लाडनूं। 11 अगस्त, 2026
भगवान महावीर के प्रतिनिधि, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी ने मुख्य प्रवचन में ‘उच्चार-प्रस्रवण के लिए निर्देश’  विषय पर उत्तरज्झयणाणि आगम के आधार पर चतुर्विध धर्मसंघ को पावन देशना प्रदान की।
उत्सर्ग समिति (पंचमी समिति) और स्वास्थ्य व अहिंसा का विवेक–
1. तेरह नियमों की महत्ता : साधु जीवन में ५ महाव्रत, ५ समितियां और ३ गुप्तियां—ये तेरह नियम मुख्य होते हैं। हमारे धर्मसंघ का नाम भी 'तेरापंथ' है और चारित्रात्माओं के मूल नियम भी तेरह हैं। इनमें पाँचवीं समिति 'उत्सर्ग समिति' है।
2. उत्सर्जन और स्वास्थ्य : अर्जन के साथ विसर्जन शरीर की स्वाभाविक आवश्यकता है। आगम में निर्देश है कि मल-मूत्र के वेग को रोकना नहीं चाहिए। विसर्जन हो जाना स्वास्थ्य और दैनिक कार्य दोनों की दृष्टि से उत्तम है।
3. प्रतिलेखन व अहिंसा की चेतना : पूज्य प्रवर ने फरमाया कि वर्षाकाल या हरियाली के दौरान भी उत्सर्ग में अहिंसा की चेतना अनिवार्य है। वर्तमान संदर्भ में टॉयलेट का उपयोग करने से पूर्व दरवाजा बंद करने से पहले उसका भली-भांति प्रतिलेखन  कर लेना चाहिए।
चतुर्दशी हाजरी: श्रावक-साधु संबंध और गुरु-आज्ञा–
1. श्रावक हैं माता-पिता तुल्य : चतुर्दशी के संदर्भ में हाजरी का वाचन करते हुए आचार्यश्री ने कहा कि श्रमणोपासक साधुओं के माता-पिता के समान हैं, जो आहार-पानी और औषध से संयम यात्रा में सहयोग करते हैं।
2. दोष दिखे तो एकांत में बताएं : यदि श्रावक को किसी साधु में कोई दोष दिखाई दे, तो उसे सबके सामने न कहकर एकांत में बताना चाहिए और गुरु के समक्ष प्रायश्चित ग्रहण करने का निवेदन करना चाहिए। साधु-साध्वियों को भी अपने साधुपना को जीवनभर अखंड रखने के प्रति सजग रहना चाहिए।
साध्वी पद्मप्रभा जी को बख्शीश–
आचार्यश्री की अनुज्ञा से साध्वी पद्मप्रभा जी ने लेखपत्र का उच्चारण किया तथा 'दसवेआलियं' आगम के श्लोक सुनाए। आचार्यश्री ने प्रसन्न होकर उन्हें ५ कल्याणक की बख्शीश प्रदान की।
'पावस प्रवास' लोकार्पण एवं उपासक श्रेणी शिविर–
१.साहित्य लोकार्पण: योगक्षेम प्रवास व्यवस्था समिति के पदाधिकारियों द्वारा पूज्य प्रवर के समक्ष 'पावस प्रवास' और 'फड़द' का लोकार्पण किया गया। मुनि सुमति कुमार जी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी।
उपासक श्रेणी का लक्ष्य: आचार्यश्री की सन्निधि में उपासक श्रेणी प्रशिक्षण शिविर का मंचीय उपक्रम हुआ। जयंतीलाल सुराणा व सहसंयोजक राहुल खोखावत ने विचार व्यक्त किए।
२.पावन आशीर्वाद: पूज्यश्री ने उपासक श्रेणी को १,००० सक्रिय सदस्य बनाने का लक्ष्य देते हुए तत्त्वज्ञान के विकास और जैन धर्म व तेरापंथ का प्रभावी प्रचार-प्रसार करने की प्रेरणा दी।